झोंपड़ी में रहने वाली महिला कैसे बनी सरपंच? कभी मनरेगा में करती थीं मजदूरी, जानिए संघर्ष की कहानी

जयपुर। घाटोल बांसवाड़ा राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में कई रोचक कहानियां सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक कहानी बांसवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत मोटा टांडा की नवनिर्वाचित सरपंच आशा देवी की है। कभी मनरेगा में मजदूरी कर और आसपास के गांवों में दिहाड़ी काम करके परिवार का गुजारा करने वाली आशा देवी ने सरपंच पद के चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। उनका जीवन अभावों के बीच गुजरा है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हौसला नहीं खोया और चुनाव मैदान में उतरकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

आशा देवी आज भी कवेलूपोश मकान में रहती हैं। उनके पास न मोटरसाइकिल है, न साइकिल और न ही स्मार्टफोन। वे साधारण कीपैड मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने गांव के लोगों के बीच अपनी जगह बनाई। चुनाव प्रचार के दौरान वह लोगों को गुड़ खिलाकर उनका मुंह मीठा कराती थीं। उनकी सादगी और संघर्ष की कहानी अब गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है।

6 प्रत्याशी मैदान में, आशा देवी को मिले सबसे ज्यादा वोट:

ग्राम पंचायत मोटा टांडा में सरपंच पद के लिए कुल छह प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। मतगणना के बाद आशा देवी को सबसे ज्यादा 652 वोट मिले। उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी डिम्पी को 197 वोट मिले। इस तरह आशा देवी ने 455 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। अन्य प्रत्याशियों में भावना को 63, सुनीता को 45, गंगा राजेंग को 40 और गंगा देवी को 19 वोट मिले। आशा देवी की जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि उनका अब तक का जीवन संघर्ष और सीमित संसाधनों के बीच बीता है। कभी मनरेगा में मजदूरी करके तो कभी दूसरे गांवों में दिहाड़ी काम करके परिवार का पालन-पोषण करने वाली आशा देवी अब ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी संभालेंगी।उनकी इस जीत ने यह दिखाया है कि चुनाव में बड़े संसाधनों के बजाय जनता का भरोसा भी अहम भूमिका निभा सकता है। एक साधारण परिवार से आने वाली आशा देवी को अब गांव की कमान मिली है। ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद है कि अपने संघर्ष के दिनों में आम लोगों की परेशानियों को करीब से समझने वाली आशा देवी पंचायत की जिम्मेदारी निभाते हुए उनकी समस्याओं और जरूरतों पर ध्यान देंगी।

Leave a Comment

और पढ़ें